‘धुरंधर’ से पहले ही छा गया था ‘करमचंद’: गाजर खाने वाले जासूस ने 80 के दशक में बना दिया था स्पाई बनने का क्रेज

‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ की सफलता के बाद एक बार फिर जासूसी दुनिया को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बढ़ी है, लेकिन भारतीय टीवी पर इस जॉनर की मजबूत नींव दशकों पहले ही रखी जा चुकी थी। 80 के दशक में एक ऐसा शो आया, जिसने हर घर में अपनी पहचान बनाई और बच्चों से लेकर बड़ों तक को जासूसी दुनिया का दीवाना बना दिया। इस शो का नाम था ‘करमचंद’।

दूरदर्शन के दौर में बना सुपरहिट जासूसी शो
80 और 90 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित ‘करमचंद’ अपने समय का बेहद लोकप्रिय शो रहा। इसकी खासियत थी सस्पेंस और कॉमेडी का अनोखा मिश्रण, जिसने दर्शकों को बांधे रखा। उस दौर में लोग अपने काम छोड़कर इस शो को देखने के लिए टीवी के सामने बैठ जाया करते थे। शो की कहानी मर्डर मिस्ट्री और जासूसी मामलों के इर्द-गिर्द घूमती थी, जिसने इसे अलग पहचान दिलाई।

गाजर खाने वाला जासूस बना स्टाइल आइकन
इस शो में जासूस करमचंद का किरदार पंकज कपूर ने निभाया था, जो अपनी अलग स्टाइल के लिए मशहूर हुआ। काले चश्मे, बिना टक की शर्ट और ब्लेजर के साथ-साथ गाजर खाते हुए केस सुलझाना उनकी पहचान बन गई थी। उनकी सेक्रेटरी के रूप में सुष्मिता मुखर्जी नजर आईं, और दोनों की जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसके अलावा अर्चना पूरन सिंह और सुचेता खन्ना भी अहम भूमिकाओं में दिखाई दीं।

बच्चों में जासूस बनने का बढ़ा क्रेज
‘करमचंद’ का प्रभाव इतना गहरा था कि बच्चे डॉक्टर या इंजीनियर नहीं, बल्कि जासूस बनने की जिद करने लगे थे। शो ने न सिर्फ मनोरंजन किया, बल्कि एक नई सोच और कल्पना को भी जन्म दिया।

दूसरे सीजन को नहीं मिली पहली जैसी सफलता
साल 1985 में शुरू हुआ यह शो धीरे-धीरे दर्शकों का पसंदीदा बन गया। इसकी लोकप्रियता को देखते हुए साल 2006 में इसका दूसरा सीजन भी लाया गया, लेकिन वह पहले जैसा असर नहीं छोड़ पाया। इसके बावजूद ‘करमचंद’ आज भी दर्शकों की यादों में खास जगह रखता है।

IMDb पर शानदार रेटिंग
‘करमचंद’ को IMDb पर 8.6 की बेहतरीन रेटिंग मिली है, जो इसकी लोकप्रियता और गुणवत्ता को दर्शाती है। पंकज कपूर की इस शो से जुड़ी पहचान आज भी कायम है।

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